6.2 C
New York
Sunday, Mar 26, 2023
DesRag
विचार

और अप्रैल फूल मत बनिए

राकेश अचल
आप चूंकि मेरे निकट के रिश्तेदार हैं,पाठक हैं, प्रशंसक हैं,आलोचक हैं इसलिए मेरा नैतिक कर्तव्य बनता है की मै भी आपकी लगातार चिंता करूं। आपका हिट-अनहित देखूं।आपको आगाह करूँ। मैं ये काम लगातार करता हूँ हालाँकि ऐसा करना घाटे का सौदा है,पर हर काम तो फायदे के लिए नहीं किया जाता? मैं भी नफा-नुक्सान पर ज्यादा ध्यान नहीं देता।
बहरहाल मार्च गया और अप्रैल आ गया है। आज दुनिया में हास परिहास का दिन है। एक -दुसरे को मूर्ख बनाने का दिन है। इसे अप्रैल फूल बनाना कहते हैं। दुनिया पता नहीं कब से एक दुसरे को मूर्ख बना रही है लेकिन बदनाम हो गया है बेचारा एक अप्रैल। हमारे यहां तो इस दिन की महिमा पर ‘दि कश्मीर फ़ाइल’ से बेहतर फिल्म भी बनी और गाना भी लिखा तथा गया गया,’अप्रैल फूल बनाया,आपको गुस्सा आया, हमारा क्या कुसूर,जमाने का कुसूर,जिसने दस्तूर बनाया।
यानि पहली अप्रैल को एक-दुसरे को मूर्ख बनाना,उसके साथ मजाक करना जब दस्तूर बन जाये तो उसका बुरा नहीं माना जाता। अप्रैल फूल डे को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं लेकिन इसके कोई पुख्ता प्रमाण नहीं हैं। कई जगह कहा गया है कि इसकी शुरुआत 1392 में हुई थी। कहीं कहा जाता कि अप्रैल फूल्स डे (मूर्ख दिवस) की शुरुआत फ्रांस में 1582 में उस वक्त हुई, जब पोप चार्ल्स 9 ने पुराने कैलेंडर की जगह नया रोमन कैलेंडर शुरू किया था। ‘अप्रैल फूल डे’ (April Fool’s Day) 19 वीं शताब्दी से ही लोकप्रिय है, पर यह देश में किसी सार्वजनिक अवकाश के तौर पर नहीं मनाया जाता है। यूक्रेन के ओडेसा में अप्रैल का इस पहले दिन आधिकारिक अवकाश मनाया जाता है। अप्रैल फूल के दिन पड़ोसी पर हानिरहित शरारतों के खेलने का रिवाज दुनिया में आम रहा है।
हम हिन्दुस्तानी सबसे आगे रहने के आदी हैं इसलिए अप्रैल आने का इन्तजार नहीं करते और मार्च में ही ये पुण्य कार्य कर लेते हैं होली पर मूर्ख सम्मेलन आयोजित कर हमारे यहां भले ही अप्रैल फूल मनाने के लिए अलग से कोई दिन नहीं है,कोई राष्ट्रीय अवकाश नहीं है लेकिन हम ये काम रोजाना करते हैं। हमारी सरकारें जनता को मूर्ख बनाती हैं और जनता सरकारों को,बीते पचहत्तर सल से ये काम अनवरत चल रहा है। इसके लिए मै न नेहरू को दोषी मानता हूँ और न नरेंद्र को। मूर्ख बनाना हमारा नेशनल कैरेक्टर है। हमारी पहचान बन गया है एक दुसरे को मूर्ख बनाना। इसीलिए मै हर पहली अप्रैल को अपने लोगों को आगाह करता हूँ की ये आजादी का अमृत महोत्स्व मनाने का वर्ष है। सो इसे मनाओ ,किसी को मूर्ख मत बनाओ और न बनो।
हमारे यहां कोई भी राजनीतिक दल किसी भी चुनाव के समय अपने चुनावी घोषणापत्र में ये वादा नहीं करता की वो अपने मतदाता को सरकार बनने पर मूर्ख बनाएगा यानि अप्रैलफूल बनाएगा ,लेकिन बनाते सब हैं। इसलिए इस मामले में मान लेना चाहिए की हमारे सभी राजनीतिक दलों का बुनियादी एजेंडा एक ही है सब चाहते हैं की उसका मतदाता पूरे पांच साल मूर्ख बनता रहे। भले ही इसके लिए सरकार को खजाने से मुफ्त का राशन देना पड़े,मुफ्त की बिजली देना पड़े,लेपटाप,स्कूटी बांटना पड़े। मुफ्तखोरी का आदी आदमी आसानी से मूर्ख बन जाता है।
मूर्ख बनने और बनाने के मामले में मै तनिक कबीरपंथी हूँ। मैंने बचपन में ही कबीरदास जी की बात गाँठ बाँध ली थी कि –
‘कबीर आप ठगाइये, और न ठगिये कोय
आप ठगै सुख, ऊपजै और ठगे दुख होय
कबीर दास जी ने अप्रैल फूल के बारे में तो साफ़ -साफ़ कुछ नहीं कहा लेकिन उन्होंने फूल और कांटे के बारे में जो कहा मै उसे ही अप्रैल फूल के लिए कहा मान लेता हूँ। वे कहते हैं कि –
जो तोको काटा बुवै, ताहि बुवै तू फूल
तोहि फूल को फूल है, वाको है तिरशूल
दुनिया में सब अपने-अपने ढंग से अप्रैल फूल मानते हैं
लेकिन हमारी तरह कोई नहीं मनाता। हम लोकतंत्र कि साथ अप्रैल फूल मानते हैं। अप्रैल आने से पहले मनाते हैं। फ्रांस, इटली, बेल्ज‍ियम में कागज की मछली बनाकर लोगों के पीछे चिपका दी जाती है और मजाक बनाया जाता है।स्पेनिश बोलने वाले देशों में 28 दिसंबर को अप्रैल फूल मनाया जाता है, जिसे डे ऑफ होली इनोसेंट्स कहा जाता है। ईरानी फारसी नववर्ष के 13वें दिन एक-दूसरे पर तंज कसते हैं, यह 1 या 2 अप्रैल का दिन होता है।डेनमार्क में 1 मई को यह मनाया जाता है और इसे मज-कट कहते हैं।
जैसा कि मैंने शुरू में ही कहा की आप अप्रैल कि दिन फूल मत बनिये और न किसी को बनाइये। आप इस मामले में हमारे ज्योतिषियों को फॉलो कीजिये। वे कहते हैं कि चैत्र मास की अमावस्या 31 मार्च दोपहर 12.25 से शुरू हो गई। यह 1 अप्रैल की सुबह 11.54 बजे तक रहेगी। अमावस्या तिथि इसलिए दोनों दिन मानी जाएगी। 31 मार्च को श्राद्ध अमावस्या है। कल स्नान-दान अमावस्या है। ज्योतिषियों के मुताबिक 1 अप्रैल को सर्वार्थसिद्धि और अमृतसिद्धि योग रहेगा। जिस कारण इस दिन किए गए कामों का पुण्य दोगुना हो जाएगा। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करना शुभ रहता है। वह कुछ उपाय कर मां लक्ष्मी को भी प्रसन्न किया जा सकता है।
चलिए तो लग जाइये अपने-अपने काम पर ,मैंने तो अपना काम कर दिया,न आपको अप्रैल फूल बनाया और न खुद बना। हास -परिहास का ये दिन आप सभी को मंगलमय हो।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

Related posts

होमो सेक्सुअलिटी का आखिर मज़हब से क्या लेना

desrag

कश्मीर के साथ छल के तीन साल

desrag

बाबरी मस्जिद से बाबर तक

desrag

Leave a Comment