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Tuesday, Jun 6, 2023
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विचार

“नसीब में जिसके जो लिखा था”

सोमेश्वर सिंह
दुनिया में अंडरवर्ल्ड का इतिहास रहा है कि जब संवैधानिक व्यवस्था के तहत आम जनमानस को न्याय नहीं मिल पाता तभी वे शॉर्टकट रास्ता अपनाते हैं। डॉन और माफिया ढूंढते हैं। जिससे उन्हें त्वरित न्याय मिलता है। मैकेनिकल युग में जो काम सुपारी किलर करते थे, वही काम इन्फोटेक्नोलॉजी के युग में सरकारें कर रही हैं। सूचना प्रौद्योगिकी ने लोकतांत्रिक ढांचे को हाईजैक कर लिया है। प्रजातांत्रिक ढंग से चुनी गई सरकारों के मुखिया डॉन स्टाइल में काम कर रहे हैं। इसी टेक्निक ने उत्तर प्रदेश में वापस पवेलियन जाते हुए बाबा योगी को बैटिंग के लिए पुनः रिकॉल कर लिया।
उसी टेक्निक के रास्ते शिवराज मामा भी चल पड़े हैं। लेकिन मध्यप्रदेश में साध्वी उमा भारती स्पीड ब्रेकर बनके खड़ी हो गई है। उन्होंने शराबबंदी को लेकर बखेड़ा खड़ा कर दिया है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के अंग्रेजी शराब दुकान में पत्थर मारकर बोतलें तोड़ दीं। मामा ने कहा कितना भी बड़ा व्यक्ति हो पत्थर बाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री के इस बयान से लगा जैसे पत्थर शराब के बोतल में नहीं मामा के दिल में लगा हो। प्रदेश में जगह-जगह महिलाएं शराबबंदी के लिए एकजुट होकर प्रदर्शन कर रही हैं। मुख्यमंत्री के नई शराब नीति का परिणाम यह हुआ की शराब माफिया रीवा में गैंगवार पर उतर आए हैं। तीन दिनों से रीवा शहर में शराब दुकानों का संचालन बंद है। राजधानी में उमा भारती शराब की बोतल तोड़ रही हैं। और रीवा में शराब ठेकेदार एक दूसरे का सिर फोड़ रहे हैं। लाचार पुलिस प्रशासन तमाशबीन बना है। क्योंकि दोनों शराब ठेकेदार सरकार से संबंद्ध पूर्व और वर्तमान विधायकों द्वारा पोषित हैं।
त्रेता युग में आसुरी प्रवृत्ति वाले रावण के अत्याचारों को समाप्त करने तथा धर्म की पुनः स्थापना के लिए भगवान विष्णु ने मृत्युलोक में श्री राम के रूप में अवतार लिया था। भगवान राम का जन्म चैत्र मास के नवमी को हुआ था। तभी से हिंदू पंचांग के अनुसार नव वर्ष का प्रारंभ होता है। दुर्भाग्य से कलयुग में भगवान राम के नाम पर उनकी मर्यादाओं को तार-तार किया जा रहा है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे रीवा संभाग में राम नवमी के अवसर पर रावण का जन्म हो रहा हो। पता नहीं हमारे संभाग को किसकी नजर लग गई है।
रीवा शहर में स्मार्ट सिटी के प्रणेता तथा बिल्डर समदड़िया ग्रुप के संरक्षक के संरक्षण में समदड़िया ग्रुप ने राम नवमी के शुभ अवसर पर श्री राम जन्म भूमि न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष वेदांती महाराज को आमंत्रित किया था। जिन्हें राम भक्त हनुमान की कथा पर प्रवचन देना था। धार्मिक कथाएं भी ठेके पर चला करती हैं। व्यासपीठ में वेदांती महाराज विराजमान होते। और कथावाचक कोई और। कहने का आशय यह है कि धार्मिक अनुष्ठानों में भी पेटी कांट्रैक्टर होते हैं। कानून कहता है कि कोई भी कॉन्ट्रैक्ट प्रिंसिपल एम्प्लॉयर के साथ होता है। यदि किसी पेटी कांट्रेक्टर ने कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों को भंग किया तो उसके लिए प्रिंसिपल एमपलॉयर रिस्पांसिबल होता है। लेकिन अभी तक कांट्रेक्टर और प्रिंसिपल एम्प्लॉयर को लेकर सरकार और मीडिया दोनों खामोश हैं। धर्म के नाम पर, धर्म की आड़ में भी ठेकेदारी चल रही है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए जमीनों की खरीद-फरोख्त में यह मामला पहले भी आ चुका है।
इन दिनों मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अंडरवर्ल्ड की तर्ज पर डॉन मोड में है। जगह-जगह गैरकानूनी तरीके से बुलडोजर चलवा रहे हैं। पता नहीं यह कौन सा जंगल का कानून है। इमारत कोई हो उसमें मेहनत, मजदूरी और मटेरियल लगा होता है। जिसमें एक बड़ी धनराशि खर्च होती है। यह सब राष्ट्रीय संपत्ति है। यदि वह निर्माण अवैध, अनाधिकृत या अतिक्रमण करके बनाया गया है, तब भी उसे ध्वस्त करने के बजाए सरकार द्वारा अधिग्रहित कर लिया जाए। और किसी शासकीय या सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवंटित कर दिया जाए। लेकिन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ऐसा नहीं करेंगे। आम जनता की बुनियादी समस्याओं महंगाई, बेकारी, लूट, भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, बेलगाम नौकरशाही, स्वास्थ्य, सुरक्षा शिक्षा, चिकित्सा, कुपोषण से ध्यान हटाने के लिए एंग्री यंग मैन के रूप में अपनी पर्सनैलिटी बिल्ड अप कर रहे हैं।
एक कहावत है कि-“पहले पेट में गुदगुदी करके हंसाता है। फिर चिकोटी काटता है। और अंत में मुक्का मार कर रुलाता है।”आखिर यह क्रम कब तक चलेगा। इसका फैसला ना मेरे हाथ में है। ना आपके हाथ में है। ना जनता के हाथ में है। अंत में मैं फिल्म दो बदन में गीतकार शकील बदायूं तथा गायक मोहम्मद रफी के आवाज में यही गीत गुनगुना रहा हूं-
नसीब में जिसके जो लिखा था,
वो तेरी महफिल में काम आया।
किसी के हिस्से मैं प्यास आई,
किसी के हिस्से में जाम आया।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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