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Monday, Mar 27, 2023
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अफसरों के सिनेमा प्रेम ने बढ़ा दिया सरकार का सिरदर्द

जल्द रिलीज होगी दलित अधिकारी रमेश थेटे की फिल्म ‘द बैटल ऑफ भीमा कोरेगांव’

देसराग डेस्क
मप्र में भारतीय प्रशासनिक सेवा के कई अधिकारी कहीं अपनी किताबों को लेकर सुर्खियों में रहे तो कई विवादों को लेकर और कई अपने फिल्म प्रेम को लेकर चर्चित रहे। हाल ही में फिल्म द कश्मीर फाइल्स पर बयानबाजी कर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी नियाज खान सरकार की आंखों के किरकिरी बने थे। उनके बाद अब प्रदेश के एक और आईएएस अधिकारी दलितों पर हुए अत्याचारों को लेकर बनाई अपनी फिल्म लेकर सामने आ रहे हैं। हालांकि ये अधिकारी रिटायर्ड हो चुके हैं, लेकिन वे जिस विषय पर फिल्म बना रहे हैं उस पर काफी विवाद हो चुका है। फिल्म का टाइटल है, द बैटल ऑफ भीमा कोरेगांव।
रिटायर्ड अधिकारी हैं रमेश थेटे
मप्र में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे रमेश थेटे सेवा में रहते हुए भी कई बार सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। शिवराज सरकार आए दिन उनके निशाने पर रही। उन्होंने सरकार पर यह भी आरोप लगाया था कि वे दलित और अंबेडकरवादी हैं, इसी के चलते सरकार ने उन्हें प्रमुख सचिव नहीं बनाया गया। अब यही अधिकारी दलितों के साथ हुए अन्याय पर एक मेगा फिल्म बनाकर उसे रिलीज कराने की तैयारी में जुट गए हैं।
मुख्य भूमिका में अर्जुन रामपाल और सन्नी लियोनी
रमेश थेटे सेवानिवृत्त हो चुके हैं। सेवानिवृत्ति के बाद वे फिल्म निर्माण में जुट गए हैं। थेटे का कहना है कि ‘द बैटल ऑफ भीमा कोरेगांव’ की कहानी बहुत आगे बढ़ चुकी है, इस फिल्म में मशहूर बॉलीवुड एक्टर अर्जुन रामपाल और सन्नी लियोनी लीड रोल में हैं। रमेश थेटे की माने तो इस फिल्म को जनभागीदारी से बनाया जा रहा है। थेटे ने बताया कि फिल्म को बनाने में 2500 लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई लगाई है। उनका दावा है कि फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है। थेटे कहते हैं कि फिल्म ‘द बैटल ऑफ भीमा कोरेगांव’ के निर्माण में कोविड की तीसरी लहर में कुछ रुकावट आई थी, लेकिन अब फिल्म जल्द ही रिलीज होगी।
मप्र के पहले आईएएस जो बना रहे फिल्म
रमेश थेटे प्रदेश से जुड़े भारतीय प्रशासनिक सेवा के ऐसे पहले अधिकारी हैं जो कमर्शियल सिनेमा का निर्माण कर रहे हैं। थेटे ने बताया कि फिल्म सच्ची घटनाओं पर आधारित है। जिसमें दिखाया गया है दलितों के पूर्वजों के साथ किस तरह का बर्ताव किया जाता था।
फिल्म का विषय विवादित
भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी और फिल्म के डायरेक्टर रमेश थेटे ने बताया कि ‘द बैटल ऑफ भीमा कोरेगांव’ फिल्म ईस्ट इंडिया कंपनी के 500 महार दलित सैनिकों और मराठा शासकों की बीच हुई लड़ाई की घटना पर आधारित है। फिल्म के गीतकार और गायकों में से एक वे भी हैं, रमेश थेटे ने कहा कि भारत में 20 करोड़ दलित हैं और अगर इनमें से दो करोड़ दलितों ने भी उनकी फिल्म देखी तो उन्हें पता चलेगा कि उनके पूर्वजों के साथ कैसा बर्ताव किया गया था। उन्हें किस तरह से प्रताड़ित किया जाता था और ये फिल्म जातिहीन और वर्गहीन समाज में एक क्रांति लाने का काम करेगी। उन्होंने बताया कि वे इस फिल्म को थिएटर में ही रिलीज करेंगे। फिल्म को ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज करने का उनका कोई इरादा नहीं है। जल्द ही सिल्वर स्क्रीन पर आपको ये फिल्म दिखाई देगी।
कई आईएएस-आईपीएस भी लिख चुके हैं किताबें
हाल ही आई फिल्म द कश्मीर फाइल्स पर अपनी बेबाक राय रखने वाले भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी नियाज खान भी कई किताबें लिख चुके है। उनका भी कहना है कि अभी तो उनका किताबें लिख रहे हैं, लेकिन भविष्य में वे भी फिल्म निर्देशन के बारे में सोच रहे हैं। प्रमुख सचिव रहे मनोज श्रीवास्तव भी नौकरी के दौरान कई किताबें लिख चुके हैं।

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