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Sunday, Sep 24, 2023
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राज्य

पुनर्गठन में शिवराज मंत्रिमंडल से कुछ चेहरों की हो सकती है विदाई?

मंथन:विस्तार पर लग सकती है मुहर
भोपाल(देसराग)। मध्य प्रदेश भाजपा की कोर कमेटी की बैठक 28 अप्रैल यानि गुरुवार को नई दिल्ली स्थित पार्टी के दिल्ली कार्यालय में राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में होने जा रही है। माना जा रहा है कि इस बैठक में प्रदेश में बहुप्रतिक्षित मंत्रिमंडल के पुर्नगठन पर मुहर लग सकती है। इसमें कुछ पुराने चेहरों को हटाकर नए चेहरों को मौका दिए जाने का फैसला होने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा बैठक के लिए चार सूत्रीय ऐजेंडा भी तय किया गया है। अधिकृत रूप से तो बैठक अगले साल प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर ही बुलाई गई है लेकिन इस बैठक में मंत्रिमंडल के पुनर्गठन के अलावा कई अहम मामलों पर भी चर्चा होनी तय है। जिसमें सबसे अहम मामला है सत्ता और संगठन में और बेहतर तालमेल के लिए किए जाने वाले उपायों पर चर्चा। प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की सक्रियता को देखते हुए बैठक में चुनावी रणनीति पर भी चर्चा की जानी है। बैठक में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश, प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव, राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर,प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा, संगठन महामंत्री हितानंद और गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा शामिल होंगे।
इस बैठक के लिए जो चार बिंदु तय किए गए हैं, उसमें सबसे अहम बिंदु सियासी तौर पर मंत्रियों के परफार्मेन्स पर चर्चा को माना जा रहा है। इस मामले में प्रदेश में सत्ता व संगठन स्तर पर कई बार की समीक्षा के बाद अलग-अलग कामकाज का आंकलन पहले ही किया जा चुका है। दरअसल कुछ मंत्रियों के कामकाज से दोनों ही खुश नहीं हैं। यह वे मंत्री हैं जो न तो विभाग की योजनाओं में तेजी ला पा रहे हैं और न ही मैदानी स्तर पर सरकार की योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन कर पा रहे हैं। इसकी वजह है उनके द्वारा अपने विभाग पर पकड़ न बना पाना। माना जा रहा है कि ऐसे कुछ मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाने के बारे में फैसला लिया जा सकता है। फिलहाल इस तरह के दो चार मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखने पर सहमति बन सकती है। इनमें एक नाम मालवा तो दूसरा ग्वालियर चंबल अंचल का बताया जा रहा है। प्रदेश में अभी मंत्रियों के चार पद खाली चल रहे हैं। माना जा रहा है कि अगर मंत्रिमंडल पुनर्गठन पर सहमति बन जाती है तो फिर अगले माह करीब आधा दर्जन नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। जिन नए चेहरों को मंत्री बनने का मौका मिल सकता है उन्हें चुनावी दृष्टि से जातिगत और अंचल के समीकरणों के हिसाब से कसौटी पर खरा उतरना होगा। वैसे भी करीब आधा दर्जन भाजपा के ऐसे विधायक हैं, जो प्रदेश में सरकार बनने के बाद से ही मंत्री बनने के दावेदार बने हुए हैं। इनमें प्रमुख रूप से रामपाल सिंह , राजेन्द्र शुक्ल, केदार शुक्ला, संजय पाठक , रमेश मेंदोला, गौरीशंकर बिसेन, नागेंद्र सिंह, यशपाल सिंह सिसोदिया के अलावा करण सिंह वर्मा, महेंद्र हार्डिया, सीतासरन शर्मा के नाम शामिल हैं। इसके अलावा बैठक में रिक्त पड़े निगम मंडलों में भी नियुक्ति का फैसला किया जा सकता है।
यह चार बिंदु एजेंडा में शामिल
भाजपा कोर ग्रुप की बैठक के लिए जो चार बिन्दु तय किए गए हैं, उसमें सत्ता और संगठन में और बेहतर तालमेल,मंत्रियों का परफार्मेन्स, प्रदेश भाजपा कार्यालय को तोड़कर नया भवन बनाने पर चर्चा शामिल है। दरअसल गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में अपने राजधानी प्रवास के दौरान कोर कमेटी के सदस्यों से चर्चा की थी। इसी तारतम्य में अब विस्तृत बैठक दिल्ली में आयोजित की जा रही है। इस बैठक में अगले साल होने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए सत्ता और संगठन में और बेहतर तालमेल कैसे बने इस पर विचार किया जाएगा। गौरतलब है कि कई जिलों में बेहतर तालमेल न होने की शिकायतें प्रदेश संगठन के पास आती रहती हैं। इसके अलावा चुनाव जीतने के लिए क्या किया जाना चाहिए इस पर भी बात होगी। माना जा रहा है की बैठक में अगले साल होने वाले चुनावों को लेकर रोडमैप पर भी विचार किया जाएगा।
नहीं है अधिकृत कोर ग्रुप
प्रदेश भाजपा में अब तक अधिकृत तौर पर कोर ग्रुप का गठन नहीं किया गया है। इसकी वजह से लंबे समय से सत्ता, संगठन व वरिष्ठ नेताओं की एक छोटी टोली प्रमुख मामलों को लेकर बैठकर उस पर मंथन करती है। इसी टोली में शामिल रहने वाले नेताओं को दिल्ली बैठक के लिए बुलाया गया है। पार्टी सुत्रों का कहना है कि जल्द ही प्रदेश में पार्टी के कोर ग्रुप के नामों की घोषणा कर दी जाएगी।
किस अंचल से अभी कितने मंत्री
अगर शिव मंत्रिमंडल में अंचल के हिसाब से मंत्रियों की संख्या देखी जाए तो सबसे खराब स्थिति महाकौशल अंचल की है। यहां से महज एक ही मंत्री है। जबकि, इसके पूर्व की सरकार के समय शिव मंत्रिमंडल में यहां से मंत्रियों की संख्या कहीं अधिक थी। माना जा रहा है कि इस अंचल के खाते में इस बार मंत्री के दो पद आ सकते हैं। मंत्री पद के मामले में सबसे अधिक धनी अंचल है ग्वालियर-चंबल। इस अंचल से 12 मंत्री आते हैं। इनमें सर्वाधिक 11 मंत्री सिंधिया समर्थक हैं। इसी तरह से अगर विंध्य क्षेत्र से तीन , मध्यभारत क्षेत्र और बुंदेलखंड से चार-चार मंत्री हैं , जबकि मालवा-निमाड़ अंचल से अभी नौ मंत्री हैं। इस हिसाब से इंदौर के खाते में एक पद आ सकता है।

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