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Wednesday, Sep 27, 2023
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सिवनी में दो आदिवासियों की हत्या में संघ से जुड़े संगठनों का हाथः माकपा

भोपाल(देसराग)। मध्य प्रदेश के सिवनी में दो आदिवासियों की पीट-पीटकर की गई हत्या के बाद यह साफ हो गया है कि यह पूरा घटनाक्रम सोची समझी रणनीति का एक हिस्सा है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के एक जांच दल ने इस पूरे मामले की पड़ताल कर अपनी जांच रिपोर्ट मीडिया के सामने रखी है। सरकार और बजरंग दल और भाजपा भले ही आदिवासियों की हत्या करने वालों कि बचाव में उतर आई है लेकिन जांच दल की पड़ताल में यह साफ हो गया है कि हत्या के पीछे कौन है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने पूरे घटनाक्रम का पीड़ित पक्ष और ग्रामीणों से बातचीत का ब्योरा पेश किया है। माकपा ने इस हत्याकांड की जिम्मेदारी लेने वाले संगठन श्रीराम सेना की प्रदेश प्रमुख की अब तक गिरफ्तारी न होने पर भी हैरानी जाहिर की है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा है कि दोनों आदिवासियों की हत्या के पीछे बजरंग दल, श्री राम सेना और विश्व हिंदू परिषद के लोगों का हाथ है। 20 बिंदुओं की जांच रिपोर्ट मौके से गोमांस के बरामद होने कि पुलिस के दावे को भी खारिज करती है। जांच दल ने ग्रामीणों के हवाले से यह दावा किया है कि किसी भी ग्रामीण के घर से मांस बरामद नहीं किया गया।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने बताया कि इस घटना में घायल बृजेश ने जिन 6 लोगों की नामजद रिपोर्ट लिखाई है, उन सभी के संबंध वह बजरंग दल श्रीराम सेना से हैं और मजेदार बात यह है कि भाजपा नेताओं के साथ इन अपराधियों के फोटो अभी भी यहां लगे होर्डिंस में हैं।
लाठी-डंडों से पीट-पीटकर जिन दो आदिवासियों की हत्या की गई है उनमें एक धनसा है जबकि दूसरा संपत बट्टी जो सागर गांव का रहने वाला है। धनसा अपने और अपने परिवार का पेट पालने के लिए नागपुर में मजदूरी करता था। माकपा नेता ने कहा कि जब आदिवासियों को पीटा जा रहा था उस समय हमलावर नारे भी लगा रहे थे। करीब दो दर्जन हमलावरों कि हमले में घायल दोनों आदिवासियों की अस्पताल में मौत हो गई। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के जांच दल ने घटना स्थल पर जाकर यह तथ्य जुटाए हैं। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने आरोप लगाया है कि इस मामले में प्रशासन राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है और वह अपराधियों के राजनीतिक संबंधों को उजागर करने से बच रहा है। माकपा नेता जसविंदर सिंह ने यह भी कहा कि पीड़ित परिवारों को घोषणा के बाद भी मुआवजे की राशि अब तक नहीं मिली है।
इसी तरह मृतकों के परिवार के एक-एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिए जाने की जो घोषणा की गई है उस पर अब तक कोई पहल नहीं हुई है।

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