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Monday, Sep 25, 2023
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मध्यप्रदेश में बिजली की किल्लत के बीच मुनाफे का खेल

भोपाल(देसराग)। देशभर में बिजली की कमी परेशानी का सबब बनी हुई है। लेकिन बिजली की किल्लत के बीच मप्र सरकार ने गांवों को दी जाने वाली बिजली खुले बाजार में बेचकर मुनाफा कमाया है। इसकी भरपाई के लिए अब गांवों में 6 घंटे तक बिजली की कटौती की जा रही है। सरकार ने यह कदम उस समय उठाया है जब प्रदेश में रिकॉर्डतोड़ गर्मी पड़ रही है। उधर बिजली कटौती के कारण किसानों की फसलों का पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। जिससे उनकी फसलें सूख रही हैं।
गौरतलब है कि कोयले की कमी के कारण इस बार मप्र सहित देशभर में बिजली का उत्पादन कम हो रहा है। इस कारण मप्र के गांव और शहरों में 3 से 6 घंटे की बिजली कटौती हो रही है, लेकिन राज्य सरकार ने अप्रैल महीने में ही 1 करोड़ 37 लाख यूनिट (13.7 मेगावाट) बिजली खुले बाजार में बेच दी। इससे बिजली का संकट और गहरा गया। जिसका खामियाजा ग्रामीण जनता और किसानों को उठाना पड़ रहा है।
…तो 50 हजार किसानों को एक महीने तक मिलती बिजली
जानकारों का कहना है कि यदि यह बिजली नहीं बेची जाती तो गांव में तीन हॉर्सपावर बिजली उपयोग करने वाले 50 हजार किसानों को एक महीने तक बिजली मिल जाती। स्टेट लोड डिस्पेच सेंटर जबलपुर की रिपोर्ट के अनुसार 16 मई के आंकड़े बता रहे हैं कि 11900 मेगावाट आपूर्ति हुई, जबकि 1500 से 2000 मेगावाट की कटौती की गई। इतना ही नहीं, फिक्स चार्ज बचाने के नाम पर भी 1000 मेगावाट बिजली गुजरात के लिए सरेंडर कर दी है। इससे फिक्स चार्ज के 190 करोड़ रुपए बचे हैं। खरगोन एनटीपीसी पावर स्टेशन की 330 मेगावाट बिजली गुजरात के लिए 30 जून तक सरेंडर है। मोदा एनटीपीसी नागपुर की 368 मेगावाट बिजली गुजरात के लिए 5 साल तक सरेंडर है और महाराष्ट्र को जाने वाली सोलापुर एनटीपीसी की 295.88 मेगावाट बिजली भी इस सूची में शामिल है, जिसे 15 जून तक सरेंडर किया गया है।
निजी कंपनियों ने भी खुले बाजार में बेची बिजली
पश्चिम क्षेत्र के 7 राज्यों में मप्र इकलौता है जिसने खुले बाजार में बिजली बेची और सरेंडर की। एमपीईबी के अलावा मप्र में बिजली पैदा कर रहीं निजी पावर कंपनियों ने भी एग्रीमेंट नहीं होने की सूरत में 6.51 करोड़ यूनिट बिजली खुले बाजार में बेची। यानी अप्रैल 2022 में कुल 7.88 करोड़ यूनिट बिजली मप्र से बेची गई। मप्र ने अप्रैल 2022 में 30.28 करोड़ यूनिट बिजली एक्सचेंज व बैंकिंग के माध्यम से अन्य राज्यों को दे दी। भारत सरकार के पश्चिम क्षेत्र विद्युत कमेटी मुंबई की रिपोर्ट के अनुसार मप्र इकलौता राज्य है, जिसने इंडियन एनर्जी एक्सचेंज मुंबई के माध्यम से करोड़ों यूनिट बिजली अन्य प्रदेशों को बेची। वहीं पश्चिम क्षेत्र के अन्य राज्य महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और गुजरात ने बिजली खरीदी। इसके अलावा मप्र पॉवर मैनेजमेंट कंपनी ने 22.4 करोड़ यूनिट बिजली बैंकिंग के नाम पर छत्तीसगढ़ व ओडीशा राज्य को दे दी। इसके लिए यह दावा किया गया कि रबी सीजन में वापस ले ली जाएगी। बिजली विभाग के सूत्रों का कहना है कि बैंकिंग में भी प्रति यूनिट 1.25 रुपए का नुकसान होता है जो सालाना 400 करोड़ के करीब है। छत्तीसगढ़ को बैंकिंग के नाम से 14.30 करोड़ यूनिट और ओडीशा को 8.1 करोड़ यूनिट बिजली दी।

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