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Wednesday, Sep 27, 2023
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राज्य

कांग्रेस में प्रचार शुरू, भाजपा में अब भी है ऊहापोह!

देसराग ब्यूरो।
मध्यप्रदेश में नगर निगमों के महापौर पद के उम्मीदवारों को लेकर कांग्रेस ने बाजी मार ली है तो भाजपा अभी में कवायद का दौर जारी है। इस बीच कांग्रेस ने भाजपा को पीछे छोड़ते हुए 15 महापौर के उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। उधर भाजपा में अब भी उहाफोह की स्थिति बनी हुई है।
हालांकि शनिवार को भाजपा कोर कमेटी की होने वाली बैठक में नाम तय होने की उम्मीद है, ऊहापोह के चलते निकाय चुनावों के लिए तय की जाने वाली गाइड लाइन पर अंतिम मुहर नहीं लग पा रही है।

इसकी वजह से उम्मीदवारों के चयन का काम भी आगे नहीं बढ़ पा रहा है। यह बैठक पहले गुरुवार को बुलाई गई थी, जिसकी वजह से टिकट की चाह में प्रदेश भाजपा कार्यालय में दावेदारों की भीड़ उमड़ पड़ी। वे प्रदेश अध्यक्ष व अन्य प्रदेश पदाधिकरियों से मिलकर अपना बायोडाटा सौंपते रहे। प्रदेश अध्यक्ष के न मिलने पर वे प्रदेश कार्यालय मंत्री और अन्य पदाधिकारियों से मिलकर टिकट का आग्रह कर रहे हैं।

दरअसल पांच दिनों बाद प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा बुधवार को प्रदेश कार्यालय में पहुंचे थे, जिसकी जानकारी मिलने के बाद आसपास के शहरों से दावेदारों का भोपाल आना शुरू हो गया था। इनमें महापौर से लेकर पार्षद तक के प्रत्याशी पद के दावेदार भी शामिल थे। कई नेता अपनी पत्नियों को साथ लेकर आए थे और उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष से मिलकर अपनी दावेदारी जताई। प्रदेश अध्यक्ष ने उनसे कहा कि पार्षद के नाम जिलों से तय होंगे और पार्टी योग्य और समर्पित कार्यकर्ताओं का टिकट वितरण में पूरा ध्यान रखेगी। इस दौरान इंदौर, देवास, सागर, उज्जैन समेत कई शहरों के दावेदारों ने प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात की। इनमें जिला और जनपद पंचायत का चुनाव लड़ने वाले नेता भी शामिल थे। इन नेताओं ने पार्टी से अधिकृत समर्थन मांगा।

भाजपा में ऐसे दावेदार
राजधानी में महापौर पद के लिए भाजपा संगठन और सरकार ऐसे चेहरे की तलाश में है जो नया हो, लेकिन शहर में उसकी पहचान हो। इस बीच पार्षद व महापौर का चुनाव हार चुके कुछ नेता दावेदारी करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। अधिकांश महिलाएं खुद के लिए और पूर्व पार्षद अपनी पत्नी के लिए आला नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। महापौर पद के लिए पार्टी के साथ ही उसकी विचारधारा से जुड़े लोगों में भी योग्य चेहरे को तलाशा जा रहा है। इधर, पार्टी के मौजूदा विधायक ऐसे लोगों को पार्षद या महापौर बनवाने की कोशिश कर रहे हैं जो सिर्फ उनकी सुनें।

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